सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 क्या है | Sovereign Gold Bond Scheme

Sovereign Gold Bond Scheme 2022-23। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 क्या है? SBI Sovereign Gold Bond। टैक्स दरें, नियम और शर्ते

गोल्ड मुद्रीकरण योजना के तहत सरकार द्वारा नवम्बर 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉण्ड स्कीम में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत भारत सरकार के परामर्श से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किश्तों में निवेश शुरू किया गया है। आरबीआई समय –समय पर इस योजना की नियम एवं शर्तों को अधिसूचित करता है।

Sovereign Gold Bond Scheme 2022-23 – सीरीज़ I: केंद्र सरकार द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2022-23 की पहली किश्त 20 जून, 2022 सोमवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गई है और यह 24, 2022 जून शुक्रवार तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले शुक्रवार को Sovereign Gold Bond Scheme 2022-23 – सीरीज I का निर्गम मूल्य 5,091 रुपये प्रति ग्राम तय किया था।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के तहत, आरबीआई सरकार की ओर से बांड जारी करता है। ये बॉन्ड बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL), क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCIL), पोस्ट ऑफिस और स्टॉक एक्सचेंजों – नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) और BSE के माध्यम से बेचे जाते हैं। इसे नवंबर 2015 में भौतिक सोने की मांग को कम करने और घरेलू बचत का एक हिस्सा – सोने की खरीद के लिए इस्तेमाल – वित्तीय बचत में स्थानांतरित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

Sovereign Gold Bond Scheme

  • भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी।
  • बॉन्ड को 1 ग्राम की इकाई के आधार पर सोने के वज़न ग्राम में गुणकों में दर्शाया जाएगा।
  • बॉन्ड की अवधि 8 वर्ष होगी और 5वें, 6 वें और 7 वें साल में योजना से बाहर निकालने का प्रयोग ब्याज भुगतान की तारीखों पर किया जा सकता है।
  • न्यूनतम स्वीकार्य निवेश सीमा 1 ग्राम सोना हैं।
  • निवेश की अधिकतम सीमा एकल वैयक्ति के लिए 4 किलो, हिंदु अविभाजित परिवार के लिए 4 किलोग्राम और ट्रस्टों और इसी तरह की संस्थाओं के लिए 20 किलोग्राम प्रत्येक वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) में सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाएगी। इस आशय की एक स्व-घोषणा ली जाएगी। वार्षिक सीमा में सरकार द्वारा प्रारंभ में जारी और द्वितीयक बाजार से खरीदे गए एवं विभिन्न चरणों में निवेश के तहत रखे गए बांड शामिल होंगे।
  • संयुक्त धारिता के मामले में 4 किलोग्राम की निवेश सीमा केवल प्रथम आवेदक पर लागू होगी।
  • नया इश्यू जारी करने से पहले आरबीआई बॉन्ड के इश्यू मूल्य का विवरण देते हुए प्रेस विज्ञप्ति जारी करेगा। बॉन्ड का मूल्य भारतीय रुपयों में निर्धारित किया जाएगा जोकि बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा सप्ताह के अंतिम 3 व्यावसायिक दिनों के लिए प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत मूल्य के आधार पर होगा।

एसबीआई सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का भुगतान

  • बांड का भुगतान नकद (अधिकतम रु 20,000/ – तक) या डिमांड ड्राफ्ट या चेक या इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग के माध्यम से किया जाएगा।
  • गोल्ड बांड को सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 के तहत भारत सरकार के स्टॉक के रूप में जारी किया जाएगा। निवेशकों को इस हेतु होल्डिंग प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। बॉन्ड को डीमैट के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
    मोचन मूल्य भारतीय रुपये में होगा जो आईबीजेए द्वारा सप्ताह के अंतिम 3 व्यावसायिक दिनों के लिए प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत मूल्य के आधार पर तय किया जाएगा।
  • भारतीय स्टेट बैंक की सभी शाखाएँ इन निवेशों को स्वीकार करने के लिए प्राधिकृत हैं।
  • निवेशकों को सांकेतिक मूल्य पर 2.50 प्रतिशत प्रतिवर्ष की तय दर पर ब्याज दिया जाएगा, यह अर्ध-वार्षिक आधार पर देय होगा।
  • • ऋण के लिए बांड का उपयोग संपार्श्विक रूप में किया जा सकता है। रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी अनुदेशानुसार मूल्य पर आधारित ऋण (एलटीवी) अनुपात को साधारण स्वर्ण ऋण के बराबर किया जाना है। बांड पर ग्रहणाधिकार को प्राधिकृत बैंकों के द्वारा डिपॉजिटरी में अंकित किया जाएगा।

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पात्रता

बॉन्ड्स व्यक्ति (व्यक्ति के रूप में, या अवयस्क बच्चे की ओर से, या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से), एचयूएफ, ट्रस्ट, विश्वविद्यालय और धर्मार्थ संस्थानॉन सहित निवासी भारतीयों को बिक्री तक सीमित हैं ।

Sovereign Gold Bond को ज्वाइंट में भी खरीदा जा सकता है। इसके अलावा नाबालिग के नाम से भी लिया जा सकता है। नाबालिग के मामले में, उसके माता-पिता/अभिभावक को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए आवेदन करना होगा। जरूरत पड़ने पर निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के एवज में लोन भी ले सकता है। इसके लिए गोल्ड बॉन्ड गिरवी रखना होगा। इसके अलावा, स्टॉक एक्सचेंज में गोल्ड बॉन्ड का कारोबार होता है। हालांकि, यह उनके जारी होने के 15 दिनों के भीतर किया जा सकता है।

के वाई सी

केवाईसी मानदंड वही होंगे जो भौतिक सोने की खरीद के लिए निर्धारित हैं। केवाईसी दस्तावेज जैसे वोटर आईडी, आधार कार्ड / पैन या टैन / पासपोर्ट की आवश्यकता होगी।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर ब्याज आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर योग्य है। एक वित्तीय वर्ष में गोल्ड बॉन्ड से अर्जित ब्याज गोल्ड बॉन्ड पर अर्जित ब्याज को अन्य स्रोतों से करदाता की आय में गिना जाता है। इसलिए, इस पर कर लगाया जाता है कि करदाता किस आयकर स्लैब में आता है। हालांकि, गोल्ड बॉन्ड से अर्जित ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं है। Sovereign Gold Bond Scheme की मैच्योरिटी अवधि 8 साल है। 8 साल पूरे होने के बाद ग्राहक को मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है।

रखरखाव का झंझट नहीं

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पेपर फॉर्म में होता है। इसलिए इसमें ऐसी कोई समस्या नहीं है कि इसे फिजिकल गोल्ड की तरह कहां रखा जाए। आप बॉन्ड पेपर को संभाल कर आसानी से फाइल में सुरक्षित रख सकते हैं। बांड आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) की किताबों में रखे जाते हैं या डीमैट रूप में रखे जाते हैं। इसलिए शेयर के नुकसान का कोई खतरा नहीं है।

टैक्स दरें, नियम और शर्ते

Sovereign Gold Bond Scheme से समय से पहले निकलने के दो तरीके हैं। ऐसा करने पर बॉन्ड रिटर्न पर अलग-अलग टैक्स दरें लगती हैं।

  1. आम तौर पर Sovereign Gold Bond की लॉक-इन अवधि 8 साल होती है। इस अवधि की समाप्ति के बाद और परिपक्वता अवधि के पूरा होने से पहले गोल्ड बॉन्ड की बिक्री से मिलने वाले रिटर्न को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में रखा जाता है। अतिरिक्त उपकर और अनुक्रमण लाभ के साथ दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर 20 प्रतिशत है।
  2. यदि गोल्ड बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, तो उन्हें आरबीआई द्वारा अधिसूचित तारीख से स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार किया जा सकता है। अगर गोल्ड बॉन्ड खरीद की तारीख से 3 साल के भीतर बेचा जाता है, तो प्राप्त रिटर्न को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा। इसे निवेशक की वार्षिक आय में जोड़ा जाएगा और लागू टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगाया जाएगा। दूसरी ओर, यदि गोल्ड बॉन्ड खरीद की तारीख से 3 साल पूरे होने के बाद बेचा जाता है, तो प्राप्त रिटर्न को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाएगा और अतिरिक्त उपकर और इंडेक्सेशन लाभों के साथ 20 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा।
  3. आरबीआई के अनुदेशानुसार आय कर विभाग द्वारा निवेशकों को जारी पैन संख्या का प्रत्येक आवेदन के साथ होना जरूरी है चूंकि प्रथम / एकल आवेदक का पैन संख्या अनिवार्य है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड कहां से ख़रीदे

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सभी बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड (BSE) के माध्यम से बेचे जाते हैं। छोटे वित्त बैंकों और भुगतान बैंकों को Sovereign Gold Bond Scheme बेचने की अनुमति नहीं है।

मेकिंग चार्ज और जीएसटी नहीं

सोने के आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज और जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) का भुगतान करना पड़ता है लेकिन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के साथ ऐसा नहीं है। इन पर न तो जीएसटी है और न ही मेकिंग चार्ज का झंझट। साथ ही फिजिकल गोल्ड के मामले में भी सोने की शुद्धता पर ध्यान देना होता है, वह झंझट भी गोल्ड बॉन्ड में नहीं है।

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