भ्रष्टाचार मुक्त भारत विकसित भारत | Bhrashtachar Mukt Bharat Viksit Bharat 2022

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भ्रष्टाचार मुक्त भारत, विकसित भारत, Bhrashtachar Mukt Bharat Viksit Bharat 2022. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और प्रशासन में अखंडता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य सर्वोच्च निकाय है। शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक छात्रों में मूल्यों को विकसित करना है ताकि वे राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए जिम्मेदार और प्रतिबद्ध नागरिक बन सकें।

स्कूली छात्रों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए, सीबीएसई ने सीवीसी के सहयोग से सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2022 के अवसर पर एक निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया ।

Bhrashtachar Mukt Bharat Viksit Bharat (भ्रष्टाचार मुक्त भारत विकसित भारत)

भ्रष्टाचार का अर्थ है भ्रष्ट + आचार। भ्रष्ट का अर्थ है बुरा या खराब और आचार का अर्थ है आचरण। यानी भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ वह आचरण है जो किसी भी तरह से अनैतिक और अनुचित है।

अंग्रेजों ने भारत के राजा महाराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया। देश में भ्रष्टाचार भले ही वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार ब्रिटिश शासनकाल में ही होने लगा था जिसे वे हमारे राजनेताओं को विरासत में देकर गये थे।

भ्रष्टाचार भारत में चर्चा और आंदोलन का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी के एक दशक बाद से भारत को भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा हुआ देखा गया और उस समय संसद में इस मामले पर बहस होती थी। 21 दिसंबर 1963 को संसद में भारत में भ्रष्टाचार के अंत पर बहस में राम मनोहर लोहिया का भाषण आज भी प्रासंगिक है। उस समय डॉ. लोहिया ने कहा था कि राजगद्दी और व्यापार के बीच के संबंध भारत में उतने ही भ्रष्ट और बेईमान हो गए हैं जितने विश्व के इतिहास में कभी रहे हैं।

स्विस बैंकों में भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा की गई भारतीय मुद्रा

स्विस बैंक के निदेशक कहते हैं। भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा”- भारत का अगले 30 साल का बजट बिना टैक्स के चलाया जा सकता है। या यूं कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते हैं। या आप यह भी कह सकते हैं कि भारत के किसी भी गांव से दिल्ली तक 4 लेन की सड़क बनाई जा सकती है।

यह भी कहा जा सकता है कि 500 ​​से अधिक सामाजिक परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है। यह रकम इतनी है कि अगर हर भारतीय को हर महीने 2000 रुपये दिए जाएं तो भी 60 साल खत्म नहीं होंगे। यानी भारत को किसी विश्व बैंक से कर्ज लेने की जरूरत नहीं है। जरा सोचिए… हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नौकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है।

अब इस चेन को रोकना बहुत जरूरी हो गया है। लगभग 200 वर्षों तक हमारे भारत पर शासन करके अंग्रेजों ने लगभग 1 लाख करोड़ रुपये लूटे। लेकिन आजादी के सिर्फ 64 साल में ही हमारे भ्रष्टाचार ने 280 लाख करोड़ रुपये लूटे हैं. एक तरफ यह 200 साल में 1 लाख करोड़ और दूसरी तरफ महज 64 साल में 280 लाख करोड़ है। यानी हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़ या हर महीने लगभग 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंकों में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा की गई है।

भारत को विश्व बैंक के किसी ऋण की आवश्यकता नहीं है। सोचो कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्चाधिकारियों ने रोक रखा है!

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भ्रष्टाचार के उच्च स्तर के कारण

लालच और बढ़ती प्रतिस्पर्धा

लोभ और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी भ्रष्टाचार बढ़ने का कारण है। आजकल लोग बहुत लालची हो गए हैं। वे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से ज्यादा कमाना चाहते हैं और इस दौड़ में वे अपने सपनों को साकार करने के लिए भ्रष्ट तरीके अपनाने से नहीं हिचकिचाते।

शिक्षा की कमी

शिक्षित लोगों से भरे समाज में कम भ्रष्टाचार का सामना करने की संभावना है। जब लोग शिक्षित नहीं होते हैं, तो वे अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित और भ्रष्ट साधनों का उपयोग करते हैं। हमारे देश में निम्न वर्ग शिक्षा के महत्व को कम करते हैं और इससे भ्रष्टाचार बढ़ता है।

नौकरी के अवसरों की कमी

योग्य युवाओं की संख्या की तुलना में बाजार में बहुत कम नौकरियां हैं। जहां आज कई युवा बिना नौकरी के घूमते हैं तो कुछ ऐसे काम करते हैं जो उनकी योग्यता के अनुरूप नहीं है। इन व्यक्तियों में असंतोष और अधिक कमाने की उनकी इच्छा उन्हें भ्रष्ट तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

आर्थिक विकास में बाधक

भ्रष्टाचार देश की अर्थव्यवस्था और हर व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। भारत में राजनीतिक और नौकरशाही भ्रष्टाचार के अलावा न्यायपालिका, मीडिया, सेना, पुलिस आदि में भ्रष्टाचार व्याप्त है।

अगर सरकार भ्रष्ट है, तो लोगों की ऊर्जा भटक जाती है। देश की पूंजी का रिसाव हो जाता है। भ्रष्ट अधिकारी और राजनेता स्विट्जरलैंड को पैसा भेजते हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा तैयार की गई रैंकिंग में अमेरिका को 19वां, चीन को 79वां और भारत को 84वां स्थान मिला है।

भारत के प्रमुख आर्थिक घोटाले
  • बोफोर्स घोटाला – 64 करोड़ रुपये
  • यूरिया घोटाला – 133 करोड़ रुपये
  • चारा घोटाला – 950 करोड़ रुपये
  • शेयर बाजार घोटाला – 4000 करोड़ रुपये
  • सत्यम घोटाला – 7000 करोड़ रुपये
  • स्टैंप पेपर घोटाला – 43 हजार करोड़ रुपये
  • कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला – 70 हजार करोड़ रुपये
  • 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला – 1 लाख 67 हजार करोड़ रुपये
  • अनाज घोटाला – 2 लाख करोड़ रुपए (अनुमानित)
  • कोयला खदान आवंटन घोटाला – 12 लाख करोड़ रुपये
एक सुपरपॉवर के रूप में भारत का भविष्य

राजनीतिक दलों का मूल उद्देश्य सत्ता पर काबिज रहना है। उन्होंने ऐसा हथकंडा निकाला है कि गरीबों को राहत देने के नाम पर अपने समर्थकों का समूह बना लेते हैं. कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एक विशाल नौकरशाही स्थापित की जा रही है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की दुर्दशा जगजाहिर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 40 प्रतिशत माल खर्च हो रहा है। इसलिए हम भ्रष्टाचार और असमानता की समस्याओं पर अंकुश लगाने में विफल रहे हैं। यही हमारी महाशक्ति बनने में बाधक है।

समाधान यह है कि सभी कल्याणकारी योजनाओं को समाप्त करने के बाद शेष राशि रिजर्व बैंक के माध्यम से प्रत्येक जरुरतमंद को सीधे वितरित की जाए। प्रत्येक परिवार को लगभग 2000-6000 रुपये प्रति माह मिलेंगे जो उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होंगे। मनरेगा में बैठकर फर्जी काम का ढोंग नहीं करेंगे। वे काम पर बाहर जाने और पैसा कमाने में सक्षम होंगे।

कल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार स्वतः समाप्त हो जाएगा। इस फॉर्मूले को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या राजनीतिक दलों की सत्ता का प्यार है। उनमें सरकारी कर्मचारियों की लॉबी का सामना करने की हिम्मत नहीं है। संक्षेप में, भारत एक महाशक्ति बन सकता है यदि राजनीतिक दलों द्वारा कल्याणकारी कार्यक्रमों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की विशाल सेना को समाप्त कर दिया जाए। इन पर खर्च होने वाली राशि का वितरण सीधे जरुरतमंद में किया जाए। अगर हमने इस समस्या का तुरंत समाधान नहीं किया तो हम महाशक्ति बनने का मौका गंवा देंगे।

Bhrashtachar Mukt Bharat Viksit Bharat ( भ्रष्टाचार मुक्त भारत विकसित भारत) के लिए कुछ सुझाव
  1. बड़े नोटों (2000, 500 आदि) का संचालन बंद कर देना चाहिए।
  2. जनता के प्रमुख कार्यों को पूरा करने और शिकायतों पर कार्रवाई करने के लिए समय सीमा तय की जाए। लोक सेवकों द्वारा इसे पूरा न करने पर वे दण्ड के भागी बने।
  3. विशेषाधिकार और विवेकाधिकार को कम या हटाया जा सकता है।
  4. सभी ‘लोक सेवक’ (मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, नौकरशाहों, अधिकारियों, कर्मचारियों) को हर साल अपनी संपत्ति की घोषणा करनी चाहिए।
  5. भ्रष्टाचार करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। भ्रष्टाचार की आय (सरकार द्वारा जब्ती) को जब्त करने का प्रावधान होना चाहिए।
  6. चुनाव सुधार किया जाना चाहिए और भ्रष्ट और आपराधिक तत्वों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
  7. विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन भारत लाया जाए और इससे जनहित का काम किया जाए।
मोदी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठाए गए कदम
  1. हजारों एनजीओ संस्थाओं एवं शेल-कम्पनियों को बन्द करना
  2. यूरिया की नीम-लेपन
  3. डिजिटलीकरण को बढ़ावा तथा अनेक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है, सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है।
  4. सैकड़ों बड़े भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से निकालना

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